# ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) 2026 -- तारीख़, महत्व और उत्सव मनाने का तरीक़ा

> ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को है। 2026 और 2027 की सटीक तारीखें, असली पौराणिक कथा, ईमानदार रीति-रिवाज और क्षेत्रीय भिन्नताएँ, साथ ही उस दिन का गणनाकृत पंचांग -- बिना किसी डर बेचे।
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हिंदू त्योहार 2026 - क्षेत्रीय पंचांग पर्व

## ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) 2026

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

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ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) 2026 में कब है?

ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) **शुक्रवार, 18 सितंबर 2026** को है -- गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र का तीन-दिवसीय क्रम--गौरी आवाहन, मुख्य पूजा और विसर्जन--स्थानीय नक्षत्र व पंचांग से तय होता है।

Saptami - शुक्ल पक्ष jyeshtha नक्षत्र सूर्योदय 06:14 AM

पंचांग की गणना उज्जैन के निरयन (लाहिड़ी) पंचांग से लाइव की गई है -- उज्जैन शास्त्रीय हिंदू संदर्भ मध्याह्न रेखा है -- यह कोई पूर्व-संग्रहीत अनुमान नहीं।

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तारीखें

## ज्येष्ठा गौरी पूजा की तारीखें: 2026 और 2027

हर वर्ष की सटीक सत्यापित तारीख़, उस दिन की गणना की गई तिथि के साथ।

| वर्ष | तारीख़                   | तिथि                 | स्थिति |
| ---- | ------------------------ | -------------------- | ------ |
| 2026 | शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 | Saptami - शुक्ल पक्ष | आगामी  |
| 2027 | बुधवार, 08 सितंबर 2027   | Ashtami - शुक्ल पक्ष |        |

तारीखें

## ज्येष्ठा गौरी पूजा 2026 का क्रम

मुख्य दिन और हर नामित चरण की सत्यापित तारीख़। स्थानीय पूजा और पारण समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

1. गुरुवार, 17 सितंबर 2026गौरी आवाहन
2. शुक्रवार, 18 सितंबर 2026ज्येष्ठा गौरी की मुख्य पूजा
3. शनिवार, 19 सितंबर 2026गौरी विसर्जन

अवलोकन

## ज्येष्ठा गौरी पूजा का क्या महत्व है

ज्येष्ठा गौरी पूजा महाराष्ट्र का तीन-दिवसीय घरेलू पर्व है। आवाहन पर गौरी घर आती हैं, अगले दिन मुख्य पूजा और भोजन होता है, और तीसरे दिन विदाई। कहीं मुखौटे, खड़ी प्रतिमाएँ, धातु के कलश, पत्थर या पीढ़ियों से चले आ रहे रूप उपयोग होते हैं। कई परिवार उन्हें ज्येष्ठा-कनिष्ठा की जोड़ी मानते हैं। भाव देवी को मायके लौटी सम्मानित बेटी या महिला अतिथि की तरह स्वागत करने का है।

महत्व

## पौराणिक कथा और अर्थ

परिवार के अनुसार गौरी पार्वती, महालक्ष्मी या स्थानीय बहन-देवियाँ हो सकती हैं; यह विविधता वास्तविक है। पर्व विवाहित बेटियों और रिश्तेदार महिलाओं की वापसी, भोजन और संबंध नवीनीकरण का अवसर बनता है। अनाज, सब्ज़ी, वस्त्र और आभूषण घरेलू समृद्धि और कुशल देखभाल के प्रतीक हैं। विरासत की प्रतिमाएँ महिलाओं द्वारा सँभाला गया पारिवारिक अभिलेख भी हैं।

रीति-रिवाज

## कैसे मनाया जाता है

आवाहन पर साफ़ घर में पदचिह्नों के मार्ग से गौरी लाई जाती हैं। मुख्य दिन फूल, हल्दी-कुमकुम, दीप, मिठाई और परिवारानुसार विस्तृत मौसमी भोजन होता है। विसर्जन का अर्थ अस्थायी प्राकृतिक रूप को जल देना या विरासत प्रतिमा खोलकर सुरक्षित रखना हो सकता है। कपड़े से दीप दूर रखें और धातु, प्लास्टर, प्लास्टिक या रासायनिक रंग जल में न डालें।

पूरे भारत में

## क्षेत्रीय भिन्नताएँ

एक ही त्योहार, कई नाम

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा के कुछ समुदायों में रूप मिलता है। कोंकणी, देशस्थ, CKP और अन्य परिवारों का देवी-रूप, भोजन और विदाई अलग है। यह गणेश चतुर्थी से पहले का कर्नाटक गौरी हब्बा नहीं, यद्यपि दोनों गणेश ऋतु में गौरी को मानते हैं।

तारीखें

## 2027 में ज्येष्ठा गौरी पूजा

2027 में ज्येष्ठा गौरी पूजा (गौरी आवाहन) बुधवार, 08 सितंबर 2027 को है -- गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र का तीन-दिवसीय क्रम--गौरी आवाहन, मुख्य पूजा और विसर्जन--स्थानीय नक्षत्र व पंचांग से तय होता है। उस दिन उज्जैन में Ashtami तिथि (शुक्ल पक्ष) रहती है और चंद्रमा jyeshtha नक्षत्र में होते हैं। इसकी तारीख़ क्षेत्रीय पंचांग के सौर माह, नक्षत्र या स्थानीय परंपरा के संयुक्त नियम से तय होती है।

## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठा गौरी पूजा 2026 में कब है?

ज्येष्ठा गौरी पूजा 2026 में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को है -- गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र का तीन-दिवसीय क्रम--गौरी आवाहन, मुख्य पूजा और विसर्जन--स्थानीय नक्षत्र व पंचांग से तय होता है।

ज्येष्ठा गौरी पूजा 2027 में कब है?

ज्येष्ठा गौरी पूजा 2027 में बुधवार, 08 सितंबर 2027 को है -- गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र का तीन-दिवसीय क्रम--गौरी आवाहन, मुख्य पूजा और विसर्जन--स्थानीय नक्षत्र व पंचांग से तय होता है।

ज्येष्ठा गौरी के तीन दिन कौन से हैं?

गौरी आवाहन, मुख्य पूजा-भोजन और गौरी विसर्जन या विदाई।

क्या ज्येष्ठा गौरी और महालक्ष्मी एक हैं?

कुछ परिवार महालक्ष्मी मानते हैं, कुछ पार्वती या स्थानीय बहन-देवियाँ; पारिवारिक परंपरा निर्णायक है।

क्या प्रतिमा विसर्जित करना ज़रूरी है?

नहीं। विरासत मुखौटे और पात्र सम्मान से खोलकर सुरक्षित रखे जाते हैं; केवल प्राकृतिक अस्थायी रूप स्थानीय नियम से विसर्जित करें।

और जानें

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