# आश्लेषा नक्षत्र -- सभी 4 पाद और नवमांश राशियां

> आश्लेषा नक्षत्र के चारों पाद (चरण) -- हर एक के लिए सटीक डिग्री-चाप और नवमांश (D9) राशि आवरण। अपना पाद चुनें और देखें कि यह आश्लेषा के गुणों, करियर और रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है।
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आश्लेषा (Ashlesha) - चार पाद

## आश्लेषा के चार पाद

आश्लेषा, 16°40'-30°00' कर्क तक फैला है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है। हर पाद की अपनी अलग नवमांश (D9) राशि होती है -- नीचे अपना चुनें।

आश्लेषा कर्क का समापन करता है -- 16°40′ से 30°00′ तक; स्वामी बुध हैं और अधिष्ठाता नाग देवता। इसका नवमांश-क्रम, धनु से मीन तक, कुछ दुर्लभ रचता है: चारों चरण नक्षत्र-स्वामी के प्रति तटस्थ रहते हैं, और सारा नाटक अंतिम अंशों के लिए बचा रहता है। सटीक विस्तार नीचे दिए हैं।

चारों चरण, गणना से

## आश्लेषा के चारों पाद एक नज़र में

| पाद                                     | अंश-विस्तार        | राशि | नवमांश (D9)         | नामाक्षर | स्वामी-संबंध व गरिमा |
| --------------------------------------- | ------------------ | ---- | ------------------- | -------- | -------------------- |
| [पाद 1](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/1) | 16°40′-20°00′ कर्क | कर्क | धनु (Dhanu) - गुरु  | डी (Di)  | तटस्थ                |
| [पाद 2](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/2) | 20°00′-23°20′ कर्क | कर्क | मकर (Makara) - शनि  | डू (Du)  | तटस्थ                |
| [पाद 3](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/3) | 23°20′-26°40′ कर्क | कर्क | कुंभ (Kumbha) - शनि | डे (De)  | तटस्थ                |
| [पाद 4](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/4) | 26°40′-30°00′ कर्क | कर्क | मीन (Meena) - गुरु  | डो (Do)  | तटस्थ - बुध नीच का   |

शास्त्रीय पाद-ज्यामिति (प्रति नक्षत्र 13°20′, प्रति पाद 3°20′), मानक नवमांश-चक्र और नामकरण में प्रयुक्त अवकहड़ा नामाक्षर-तालिका से गणना -- कोई पूर्व-संग्रहीत अनुमान नहीं।

पाद चुनें

## अपना सटीक चरण चुनें

[पाद 1 - पहला चरण16°40′-20°00′ कर्कनवमांश राशि: धनु (Dhanu), स्वामी गुरु।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/1)

[पाद 2 - दूसरा चरण20°00′-23°20′ कर्कनवमांश राशि: मकर (Makara), स्वामी शनि।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/2)

[पाद 3 - तीसरा चरण23°20′-26°40′ कर्कनवमांश राशि: कुंभ (Kumbha), स्वामी शनि।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/3)

[पाद 4 - चौथा चरण26°40′-30°00′ कर्कनवमांश राशि: मीन (Meena), स्वामी गुरु।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/ashlesha/pada/4)

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राशि स्थिति

## आश्लेषा राशिचक्र में कहां बैठता है

आश्लेषा कर्क से कभी बाहर नहीं जाता, इसलिए इसकी भेदक, रणनीतिक बुद्धि हर जगह चंद्रमा की अपनी ज़मीन पर काम करती है: भावनाएं ही इसकी सामग्री हैं, इसका औज़ार भी और इसका विषय भी। नक्षत्र का सर्प राशि के अंत पर कुंडली मारे बैठा है, और इस स्थिति के साथ एक संरचनात्मक टिप्पणी जुड़ी है। इसका अंतिम पाद 30°00′ कर्क तक जाता है -- वह जल-अग्नि संधि जहां कर्क सिंह बनता है -- एक गंडांत क्षेत्र, जिसे शास्त्र चंद्र स्थितियों के लिए विशेष सावधानी से पढ़ते हैं। इसे व्याख्या में सटीकता और कोमलता की मांग समझिए, चरित्र का दोष नहीं। पहले तीन चरण शांत जल में बैठे हैं, और चौथे को भी केंचुली उतारते सर्प की तरह समझना सबसे ठीक है: संवेदनशील समय, सच्चा नवीनीकरण।

नवमांश क्रम

## आश्लेषा के चार चरण कैसे खुलते हैं

इस परिवार में अनोखी बात -- आश्लेषा के किसी पाद का नवमांश-स्वामी बुध का न मित्र है, न शत्रु; चारों संबंध तटस्थ हैं, और नक्षत्र की प्रसिद्ध सूक्ष्मता बिना बाहरी दख़ल के विकसित होती है। पाद 1, धनु में, सर्प की अंतर्दृष्टि को आस्था और अर्थ पर साधता है -- दार्शनिक-निदानकर्ता। पाद 2 और 3 शनि की राशियों से गुज़रते हैं: मकर चरण रणनीतिकार है -- धैर्यवान, संरचनात्मक -- और कुंभ चरण व्यवस्थाओं और भीड़ का पर्यवेक्षक, चारों में सबसे शीतल। पाद 4, मीन में, बुध को उसकी नीच राशि में रखता है और ऊपर से गंडांत समापन जोड़ देता है: यहां विश्लेषण शुद्ध सहज-बोध को रास्ता दे देता है, और इस चरण के पाठ व्याख्या से नहीं, अनुभव से आते हैं। धैर्य से लिया जाए तो यह नक्षत्र का सबसे मौन-प्रज्ञ पाद है; बस इसे जल्दबाज़ी नहीं चाहिए -- और डर के साथ इसे कभी नहीं पढ़ना चाहिए।

देवता, गण और स्वामी

## आश्लेषा के पादों के पीछे की शक्तियां

छिपे कोष और भूजल के रक्षक नाग आश्लेषा के अधिष्ठाता हैं, और बुध स्वामी: बोध और अभिव्यक्ति साथ -- वह सर्प जो बोल भी सकता है। यहां राक्षस-गण का अर्थ है वृत्ति की तीव्रता -- वह देख लेने की तत्परता जिसे शिष्टाचार अनदेखा कर देता है। सर्प का ज्ञान हर चरण अलग ढंग से संभालता है: धनु पाद उसे सिखाता है, मकर पाद उसे प्रयोग में लाता है, कुंभ पाद उसका नक्शा बनाता है, और मीन पाद बस जानता है -- बिना शब्दों के; उस चरण के लिए उपयुक्त, जहां व्याख्याता बुध मौन हो जाता है। नाग दहलीज़ों के रक्षक हैं, और चौथा पाद सचमुच एक दहलीज़ है; उसे ठीक से पार करना ही इस नक्षत्र का गहनतम कौशल है।

अपना पाद जानें

## अपना पाद कैसे पता करें

अपना पाद कैसे पता करें

आपका पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से पढ़ा जाता है। आश्लेषा, 16°40'-30°00' कर्क में स्थित है, और उस दायरे में हर 3°20′ पर नया चरण शुरू होता है -- इसलिए तालिका में किसी सीमा के पास बैठा चंद्रमा जन्म-समय की छोटी-सी शुद्धि से भी पड़ोसी पाद में जा सकता है। नि:शुल्क कुंडली कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान डालकर चंद्रमा की सटीक डिग्री निकालें, फिर उसे ऊपर के विस्तारों से मिलाएं।

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## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरा चंद्रमा आश्लेषा के किस पाद में है?

आश्लेषा, 16°40'-30°00' कर्क में स्थित है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है -- पाद 1: 16°40′-20°00′ कर्क; पाद 2: 20°00′-23°20′ कर्क; पाद 3: 23°20′-26°40′ कर्क; पाद 4: 26°40′-30°00′ कर्क। आपका अपना पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से तय होता है; केवल जन्मतिथि से इतना संकरा दायरा नहीं सुलझता, पर तिथि, समय और स्थान से बनी नि:शुल्क कुंडली-गणना इसे तुरंत तय कर देती है।

क्या आश्लेषा के चारों पाद एक ही राशि में आते हैं?

हां। पूरा आश्लेषा कर्क के भीतर है, इसलिए चारों पाद एक ही चंद्र राशि साझा करते हैं। चरण-दर-चरण बदलती है नवमांश राशि -- धनु, मकर, कुंभ और मीन -- और यही कारण है कि एक ही राशि वाले दो आश्लेषा जातक भी एक-दूसरे से स्पष्ट अलग महसूस हो सकते हैं।

आश्लेषा का कौन-सा पाद सबसे मज़बूत माना जाता है?

आश्लेषा सबसे संतुलित नक्षत्रों में गिना जाएगा: इसके किसी चरण में उच्च, नीच, स्वराशि या वर्गोत्तम जैसा कोई चिह्न नहीं है, इसलिए इसके पाद श्रेणी से नहीं, तत्व और स्वभाव से अलग होते हैं। पाद 4 सबसे अधिक धैर्य मांगता है -- नवमांश में बुध नीच का -- जो चिंता की नहीं, धीरज की बात है। हर स्थिति में पाद से कहीं अधिक निर्णायक पूरी कुंडली होती है।

क्या नामकरण के लिए आश्लेषा का पाद मायने रखता है?

पारंपरिक नामकरण-पद्धति में, हां। आश्लेषा के हर चरण का अपना नामाक्षर है -- पाद 1 के लिए डी (Di), पाद 2 के लिए डू (Du), पाद 3 के लिए डे (De), पाद 4 के लिए डो (Do) -- जो जन्म के समय चंद्रमा के पाद से चुना जाता है। अधिकांश परिवार इसे बाध्यकारी नियम नहीं, एक सार्थक परंपरा मानते हैं; कुंडली-विश्लेषण में असली वज़न पाद की ध्वनि का नहीं, उसकी नवमांश राशि का होता है।
