# कृत्तिका नक्षत्र -- सभी 4 पाद और नवमांश राशियां

> कृत्तिका नक्षत्र के चारों पाद (चरण) -- हर एक के लिए सटीक डिग्री-चाप और नवमांश (D9) राशि आवरण। अपना पाद चुनें और देखें कि यह कृत्तिका के गुणों, करियर और रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है।
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कृत्तिका (Krittika) - चार पाद

## कृत्तिका के चार पाद

कृत्तिका, 26°40' मेष - 10°00' वृषभ तक फैला है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है। हर पाद की अपनी अलग नवमांश (D9) राशि होती है -- नीचे अपना चुनें।

कृत्तिका दो राशियों में फैलने वाला पहला नक्षत्र है: यह 26°40′ मेष से शुरू होकर 10°00′ वृषभ पर समाप्त होता है; स्वामी सूर्य हैं और देवता अग्नि। यह विभाजन नवमांश-क्रम जितना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाद 1 मंगल की अग्नि के अधीन है और पाद 2 से 4 शुक्र की पृथ्वी के। हर चरण की सटीक स्थिति नीचे तालिका में है।

चारों चरण, गणना से

## कृत्तिका के चारों पाद एक नज़र में

| पाद                                     | अंश-विस्तार       | राशि | नवमांश (D9)         | नामाक्षर | स्वामी-संबंध व गरिमा |
| --------------------------------------- | ----------------- | ---- | ------------------- | -------- | -------------------- |
| [पाद 1](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/1) | 26°40′-30°00′ मेष | मेष  | धनु (Dhanu) - गुरु  | अ (A)    | मित्र                |
| [पाद 2](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/2) | 0°00′-3°20′ वृषभ  | वृषभ | मकर (Makara) - शनि  | ई (I)    | शत्रु                |
| [पाद 3](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/3) | 3°20′-6°40′ वृषभ  | वृषभ | कुंभ (Kumbha) - शनि | उ (U)    | शत्रु                |
| [पाद 4](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/4) | 6°40′-10°00′ वृषभ | वृषभ | मीन (Meena) - गुरु  | ए (E)    | मित्र                |

शास्त्रीय पाद-ज्यामिति (प्रति नक्षत्र 13°20′, प्रति पाद 3°20′), मानक नवमांश-चक्र और नामकरण में प्रयुक्त अवकहड़ा नामाक्षर-तालिका से गणना -- कोई पूर्व-संग्रहीत अनुमान नहीं।

पाद चुनें

## अपना सटीक चरण चुनें

[पाद 1 - पहला चरण26°40′-30°00′ मेषनवमांश राशि: धनु (Dhanu), स्वामी गुरु।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/1)

[पाद 2 - दूसरा चरण0°00′-3°20′ वृषभनवमांश राशि: मकर (Makara), स्वामी शनि।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/2)

[पाद 3 - तीसरा चरण3°20′-6°40′ वृषभनवमांश राशि: कुंभ (Kumbha), स्वामी शनि।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/3)

[पाद 4 - चौथा चरण6°40′-10°00′ वृषभनवमांश राशि: मीन (Meena), स्वामी गुरु।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika/pada/4)

[मेरा सटीक पाद जानें](https://merirashi.com/hi/birth-chart-calculator)[कृत्तिका अवलोकन पर वापस जाएं](https://merirashi.com/hi/nakshatras/krittika)

राशि स्थिति

## कृत्तिका राशिचक्र में कहां बैठता है

कृत्तिका का केवल पहला पाद मेष में है; शेष तीन वृषभ में बैठते हैं। इसलिए कृत्तिका में जन्मे दो लोगों की चंद्र राशियां बिल्कुल अलग हो सकती हैं -- और यह दिखता भी है। मेष वाला चरण चलता हुआ उस्तरा है: टकराव से न घबराने वाला, तेज़, दिखावे को उसी क्षण काट देने वाला। वृषभ वाले चरण दावानल नहीं, चूल्हे की आग हैं; वही शुद्ध करने की वृत्ति अब बनाने, खिलाने और शुद्ध किए हुए की रक्षा की ओर मुड़ जाती है। टीकाकार इस बदलाव को प्रतीक से समझाते हैं -- मेष में जलाने वाली लौ, वृषभ में पकाने वाली। कृत्तिका की किसी स्थिति को पढ़ते समय पहले राशि तय कीजिए, फिर पाद; 30°00′ मेष की सीमा इस नक्षत्र के भीतर की सबसे बड़ी विभाजक रेखा है।

नवमांश क्रम

## कृत्तिका के चार चरण कैसे खुलते हैं

नवमांश-यात्रा धनु, मकर, कुंभ, मीन से चलती है। पाद 1 मेष राशि को गुरु-शासित धनु नवमांश से जोड़ता है, जो सूर्य का मित्र है: दृढ़ विश्वास और साहस साथ -- खुलकर नेतृत्व की सबसे अधिक संभावना इसी चरण में है। पाद 2 और 3 शनि की राशियों मकर और कुंभ से गुज़रते हैं, और शास्त्रीय मैत्री-तालिका में शनि सूर्य के सामने खड़ा है। ये बीच के चरण कृत्तिका की परीक्षा-भूमि हैं; अधिकार दावे से नहीं, काम और व्यवस्था से अर्जित होता है, और यहां के जातक अक्सर कम उम्र में ज़िम्मेदारी उठाते हैं। पाद 4, मीन नवमांश में, फिर मित्र गुरु के क्षेत्र में लौटकर धार को कोमल करता है: करुणा के साथ विवेक -- वह समीक्षक जो सुधारता इसलिए है कि भला हो। कृत्तिका का कोई चरण धार-विहीन नहीं; बदलता केवल यह है कि धार गति की सेवा करती है, संरचना की, सिद्धांत की या दया की।

देवता, गण और स्वामी

## कृत्तिका के पादों के पीछे की शक्तियां

यज्ञ की अग्नि हर आहुति ग्रहण कर उसे शुद्ध करती है, और सूर्य कृत्तिका को उसका स्थिर, प्रभुतापूर्ण संकल्प देता है; कार्तिकेय को पालने वाली छह कृत्तिकाएं इसमें उग्र ममता जोड़ती हैं। यहां राक्षस-गण का ठप्पा तीव्रता का सूचक है, दुर्भावना का नहीं। पाद-दर-पाद देवता की अग्नि रूप बदलती है: पहले चरण में नई ज़मीन पर ले जाई जाती मशाल, मकर चरण की भट्ठी, कुंभ चरण की साझा ज्योति, और मीन में दूसरों के लिए जलाया गया दीपक। बीच के पादों की सूर्य-शनि रगड़ इस नक्षत्र का इंजन-कक्ष है -- इसका प्रसिद्ध अनुशासन वहीं गढ़ा जाता है।

अपना पाद जानें

## अपना पाद कैसे पता करें

अपना पाद कैसे पता करें

आपका पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से पढ़ा जाता है। कृत्तिका, 26°40' मेष - 10°00' वृषभ में स्थित है, और उस दायरे में हर 3°20′ पर नया चरण शुरू होता है -- इसलिए तालिका में किसी सीमा के पास बैठा चंद्रमा जन्म-समय की छोटी-सी शुद्धि से भी पड़ोसी पाद में जा सकता है। नि:शुल्क कुंडली कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान डालकर चंद्रमा की सटीक डिग्री निकालें, फिर उसे ऊपर के विस्तारों से मिलाएं।

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## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरा चंद्रमा कृत्तिका के किस पाद में है?

कृत्तिका, 26°40' मेष - 10°00' वृषभ में स्थित है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है -- पाद 1: 26°40′-30°00′ मेष; पाद 2: 0°00′-3°20′ वृषभ; पाद 3: 3°20′-6°40′ वृषभ; पाद 4: 6°40′-10°00′ वृषभ। आपका अपना पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से तय होता है; केवल जन्मतिथि से इतना संकरा दायरा नहीं सुलझता, पर तिथि, समय और स्थान से बनी नि:शुल्क कुंडली-गणना इसे तुरंत तय कर देती है।

क्या कृत्तिका के चारों पाद एक ही राशि में आते हैं?

नहीं -- कृत्तिका राशि-सीमा के आर-पार फैला है, और यही इसका सबसे व्यावहारिक संरचनात्मक तथ्य है। पाद 1 मेष में आता है, जबकि पाद 2, 3 और 4 वृषभ में। इसलिए कृत्तिका में जन्मे दो लोगों की चंद्र राशियां अलग हो सकती हैं -- कुंडली पढ़ते समय पहले राशि तय करें, फिर पाद।

कृत्तिका का कौन-सा पाद सबसे मज़बूत माना जाता है?

कृत्तिका सबसे संतुलित नक्षत्रों में गिना जाएगा: इसके किसी चरण में उच्च, नीच, स्वराशि या वर्गोत्तम जैसा कोई चिह्न नहीं है, इसलिए इसके पाद श्रेणी से नहीं, तत्व और स्वभाव से अलग होते हैं। हर स्थिति में पाद से कहीं अधिक निर्णायक पूरी कुंडली होती है।

क्या नामकरण के लिए कृत्तिका का पाद मायने रखता है?

पारंपरिक नामकरण-पद्धति में, हां। कृत्तिका के हर चरण का अपना नामाक्षर है -- पाद 1 के लिए अ (A), पाद 2 के लिए ई (I), पाद 3 के लिए उ (U), पाद 4 के लिए ए (E) -- जो जन्म के समय चंद्रमा के पाद से चुना जाता है। अधिकांश परिवार इसे बाध्यकारी नियम नहीं, एक सार्थक परंपरा मानते हैं; कुंडली-विश्लेषण में असली वज़न पाद की ध्वनि का नहीं, उसकी नवमांश राशि का होता है।
