# रोहिणी नक्षत्र: स्वभाव, देवता, करियर और पौराणिक कथा

> रोहिणी नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में -- दशा स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा (प्रजापति)। स्वभाव, करियर, अनुकूलता और पौराणिक कथा, सावधानी और स्पष्टता के साथ समझाई गई।
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नक्षत्र - रोहिणी

## रोहिणी नक्षत्र

आर्केटाइप: रोहिणी, चंद्रमा के अधीन बैलगाड़ी / रथ। रोहिणी सभी नक्षत्रों में सबसे उर्वर और आकर्षक है -- कामुक, रचनात्मक और वृद्धि, सौंदर्य व प्रचुरता के प्रति समर्पित। चंद्र-शासित और उच्च वृषभ राशि में स्थित होने के कारण ये जातक स्वाभाविक आकर्षण से लोगों और संसाधनों को अपनी ओर खींचते हैं।

- Pada 4
- Brahma (Prajapati)
- Lord - Moon

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कथा

## पौराणिक कथा

रोहिणी चंद्रमा की सत्ताइस पत्नियों में सबसे प्रिय थी, प्रजापति दक्ष की पुत्रियां। जब चंद्र ने बाक़ी पत्नियों की उपेक्षा कर केवल रोहिणी को चाहा, तो दक्ष ने उन्हें क्षीण होने का शाप दिया -- यही चंद्रकलाओं की पौराणिक उत्पत्ति है। सृष्टिकर्ता ब्रह्मा यहां अधिष्ठाता हैं, और बैलगाड़ी का प्रतीक उस फसल और भरपूर समृद्धि को दर्शाता है जो रोहिणी के प्रिय दर्जे का प्रतीक बनी।

## विवाह और संबंधों पर प्रभाव

रिश्तों के मामले में, रोहिणी को मनुष्य गण और सर्प (नर) यौनि में रखा गया है। मनुष्य गण, सर्प-यौनि नक्षत्र होने के कारण रोहिणी अन्य मानव-स्वभाव नक्षत्रों से गहराई से जुड़ता है; इसकी गर्मजोशी और वफ़ादारी उस साथी के साथ फलती-फूलती है जो सौंदर्य, आराम और स्थायी प्रतिबद्धता के प्रति इसकी सराहना साझा करे। व्यवहार में गण और यौनि अनुकूलता के केवल एक हिस्से हैं -- साझा मूल्य और परिपक्वता किसी भी एक मिलान-कारक से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं, इसलिए इन्हें संकेत मानें, अंतिम फ़ैसला कभी नहीं।

## करियर और धन

कृषि, विलासिता के सामान, फैशन, ललित कला और संगीत इस समृद्धि-प्रधान नक्षत्र के अनुकूल हैं। बैंकिंग, रियल एस्टेट, आतिथ्य और सौंदर्य प्रसाधन इसकी मूल्य व सौंदर्य की नज़र को फल देते हैं। जो भी पोषण दे, संवारे, या दुनिया को अधिक सुखद बनाए, वह गहराई से इससे जुड़ता है। यहां स्थित कोई भी ग्रह -- विशेषकर चंद्रमा या लग्नेश -- रोहिणी की छाप को काम में उतारता है; संपूर्ण व्यावसायिक पठन के लिए इसे दशम भाव के साथ मिलाकर देखें।

## स्वास्थ्य और ऊर्जा

नक्षत्र स्थिति शरीर से ज़्यादा स्वभाव के बारे में बताती है, पर रोहिणी का चंद्रमा-स्वामित्व उन क्षेत्रों से हल्के ढंग से जुड़ा है जिन्हें चंद्रमा नियंत्रित करता है (मन और रक्त)। संतुलन बनाए रखने के लिए मनुष्य-गण स्वभाव के अनुकूल आदतें अपनाएं; यह आत्म-समझ के लिए मार्गदर्शन है, कोई चिकित्सीय निदान नहीं।

## उपचारात्मक वैदिक कदम

सरल, मुफ़्त-प्रथम अभ्यास -- कभी ज़रूरी नहीं, हमेशा वैकल्पिक।

उपचारात्मक वैदिक कदम

रोहिणी के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए इसके देवता ब्रह्मा (प्रजापति) और दशा स्वामी चंद्रमा का सम्मान करें। पहले नि:शुल्क अभ्यास के रूप में "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः" का जाप करें, और सोमवार पर सरल सेवा या दान करें। साथ ही इसके मूल विषय -- रोहिणी सभी नक्षत्रों में सबसे उर्वर और आकर्षक है -- पर सचेत रूप से चिंतन करें, ताकि इस नक्षत्र के गुण भय की बजाय समझ के साथ व्यक्त हों।

## रोहिणी के चार पाद

रोहिणी 10°00'-23°20' वृषभ तक फैला क्रमांक 4 का नक्षत्र है; रोहिणी के चार पाद इस प्रकार हैं:

पाद 1 -- 10°00′-13°20′ वृषभ, अक्षर ओ: मेष नवमांश (अग्नि, स्वामी मंगल)।

पाद 2 -- 13°20′-16°40′ वृषभ, अक्षर वा: वृषभ नवमांश (पृथ्वी, स्वामी शुक्र)।

पाद 3 -- 16°40′-20°00′ वृषभ, अक्षर वी: मिथुन नवमांश (वायु, स्वामी बुध)।

पाद 4 -- 20°00′-23°20′ वृषभ, अक्षर वू: कर्क नवमांश (जल, स्वामी चंद्रमा)।

चंद्रमा किसी भी चरण में पड़े, रोहिणी की एक ही पहचान रहती है -- चंद्रमा के अधीन बैलगाड़ी -- और रोहिणी की पाद-मार्गदर्शिका हर पाद को खोलती है।

## रोहिणी की राशि

रोहिणी का हर पाद एक ही राशि वृषभ (स्वामी शुक्र) में है, इसलिए रोहिणी का चंद्रमा राशि से वृषभ और नक्षत्र से रोहिणी, दोनों एक साथ होता है। वृषभ व्यापक स्वभाव देती है, शुक्र उसका राशीश है, और रोहिणी बारीक परत जोड़ता है।

वृषभ एक स्थिर, पृथ्वी-तत्व राशि है, इसलिए रोहिणी अपनी छाप के नीचे एक पृथ्वी आधार रखता है, जो शेष कुंडली के अनुसार स्थिति को रंगता है।

## रोहिणी में कुंडली मिलान: गण, योनि, नाड़ी

रोहिणी के तीन अष्टकूट कारक हैं: मनुष्य गण (6 गुण), सर्प (नर) योनि (4 गुण), और अंत्य (कफ) नाड़ी (सबसे भारी 8)। रोहिणी में सर्प योनि तालमेल का अंक है, मनुष्य गण स्वभाव का।

वही अंत्य (कफ) नाड़ी रोहिणी की "नाड़ी दोष" जाँच चलाती है: दो अंत्य (कफ)-नाड़ी कुंडलियाँ 8 गुण खोती हैं, पर रोहिणी प्रायः निवारण पा लेता है। फिर भी रोहिणी के अंत्य (कफ) नाड़ी, मनुष्य गण और सर्प योनि केवल इनपुट हैं जिन्हें रोहिणी का मिलान तौलता है, कोई फ़ैसला नहीं।

योनि कूट में रोहिणी की सर्प योनि शास्त्रीय रूप से नेवला योनि से टकराती है, इसलिए रोहिणी-नेवला जोड़ी वहाँ कम अंक पाती है; रोहिणी के लिए यह एक इनपुट है, बाधा नहीं।

## रोहिणी में ग्रहों का बल

रोहिणी की वृषभ भूमि चंद्रमा को उच्च करती है, और वृषभ के स्वामी शुक्र के अधीन रहती है।

रोहिणी के लिए सबसे अच्छा: इसका दशा स्वामी चंद्रमा स्वयं वृषभ में उच्च का है -- ठीक उसी भूमि पर जिस पर रोहिणी बैठा है -- तारे के लिए एक सुस्थित स्वामी।

किसी भी हाल में, चंद्रमा मन, माता और भावनाओं का कारक है और अपनी वृषभ मूलत्रिकोण में सबसे बलवान, इसलिए चंद्रमा जिस भाव-राशि में बैठे, वहीं रोहिणी के भाव प्रकट होते हैं।

गहरे नोट्स

रोहिणी 27 नक्षत्रों में से क्रमांक 4 है, जो 10°00'-23°20' वृषभ (क्रांतिवृत्त पर 40.00°-53.33°) तक विस्तृत है। इसका विंशोत्तरी दशा स्वामी चंद्रमा है, अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा (प्रजापति), गण मनुष्य और पशु-योनि सर्प (नर)। चारों पाद नवमांश राशियों मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क में पड़ते हैं, जो इस तारे की अभिव्यक्ति को इसके पूरे विस्तार में सूक्ष्म रूप से बदलते रहते हैं।

## अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे कैसे पता चले कि मेरा चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में है?

आपका चंद्रमा रोहिणी तभी है जब रोहिणी का अपना सायन (लाहिड़ी) देशांतर 10°00'-23°20' वृषभ में पड़े -- क्रमांक 4 की पट्टी। सूर्य राशि रोहिणी नहीं दिखाती; केवल असली-एफेमेरिस कुंडली ही रोहिणी के चंद्रमा का सटीक अंश और पाद बताती है।

क्या रोहिणी विवाह के लिए अच्छा नक्षत्र है?

रोहिणी गुण मिलान को मनुष्य गण, सर्प (नर) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी देता है, पर इनमें से कोई अकेले रोहिणी को विवाह के लिए "अच्छा" या "बुरा" नहीं बनाता। पूरा रोहिणी पठन सप्तम भाव, शुक्र और दोष-निवारण को भी तौलता है, इसलिए रोहिणी के तीन कूट इनपुट रहते हैं -- कोई फ़ैसला नहीं जो रोहिणी दो लोगों पर थोपे।

मैं रोहिणी के किस पाद में हूँ?

रोहिणी के चार पाद: पाद 1 -- 10°00′-13°20′ वृषभ; पाद 2 -- 13°20′-16°40′ वृषभ; पाद 3 -- 16°40′-20°00′ वृषभ; पाद 4 -- 20°00′-23°20′ वृषभ। कौन-सा आपका है यह रोहिणी के 3°20′ चरणों में चंद्रमा के अंश से तय होता है, इसलिए रोहिणी को असली कुंडली चाहिए; रोहिणी के अक्षर क्रम से ओ, वा, वी, वू हैं।

रोहिणी नक्षत्र अच्छा है या बुरा?

कोई भी नहीं -- रोहिणी क्रमांक 4 का नक्षत्र है, चंद्रमा शासित, देवता ब्रह्मा (प्रजापति) और प्रतीक बैलगाड़ी / रथ के साथ, जो एक स्वभाव है, भाग्य नहीं। रोहिणी कैसे प्रकट होता है यह उसमें बैठे ग्रहों, उनकी गरिमा और शेष कुंडली पर निर्भर है। रोहिणी को शांति से पढ़ें: इसके भाव काम में लेने योग्य प्रवृत्तियाँ हैं जो रोहिणी देता है, कोई थोपा हुआ दंड नहीं।

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन-सा ग्रह है?

विंशोत्तरी में रोहिणी का स्वामी चंद्रमा है, इसलिए चंद्रमा महादशा रोहिणी के भावों को सबसे तीव्रता से जगाती है, और रोहिणी का अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा (प्रजापति) है। चूँकि रोहिणी वृषभ में स्थित है, उस राशि का स्वामी भी रोहिणी की स्थितियों का फल तय करता है।

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