# श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा -- पाद गरिमा, करियर व उपाय

> श्रवण में चंद्रमा -- चार पादों की वास्तविक नवमांश गरिमा तालिका (सम से उच्च तक), सटीक 10°00'-23°20' मकर क्रांतिवृत्त विस्तार, और चंद्रमा का दशा स्वामी चंद्रमा से संबंध। करियर, रिश्ते, स्वास्थ्य और पहले-नि:शुल्क उपाय।
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नक्षत्र x ग्रह - श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा

## श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा

चार-पाद नवमांश गरिमा -- गणना की गई, टेम्पलेट से नहीं

चंद्रमा श्रवण के चार पादों में पाद 3 (नवमांश मिथुन) में सम से लेकर पाद 2 (नवमांश वृषभ) में उच्च तक जाता है।

श्रवण की सीमा 280.00°-293.33° क्रांतिवृत्त देशांतर (शास्त्रीय रूप से 10°00'-23°20' मकर) है। इसके विंशोत्तरी दशा स्वामी चंद्रमा हैं, जो स्वयं चंद्रमा ही हैं।

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मिश्रित पठन

## श्रवण में चंद्रमा का क्या अर्थ है

चंद्रमा -- पोषण देने वाला मन -- जब राशिचक्र के बाईसवां नक्षत्र श्रवण से होकर गुज़रता है, जिसके अधिष्ठाता देवता विष्णु हैं और जिसका प्रतीक कान / तीन पदचिह्न है, तो यह अपने मन, माता और भावनाएं जैसे विषय इसमें भर देता है। श्रवण का अर्थ है 'सुनना' -- इसका विषय है सुनना, सीखना और कान के ज़रिए पवित्र ज्ञान का संचरण। एक ग्रह के रूप में, चंद्रमा श्रवण के अपने विंशोत्तरी दशा स्वामी है -- नैसर्गिक मैत्री का यह वास्तविक शास्त्रीय संबंध तय करता है कि इसके विषय श्रवण के पहले से मौजूद स्वभाव के साथ कितनी सहजता से घुलते हैं। चंद्रमा को एक सौम्य (कोमल) ग्रह माना जाता है, जल तत्व और सत्त्व गुण का, जो श्रवण के देव गण-स्वभाव में अपनी अलग छाप जोड़ता है। यह कोई अंतिम फ़ैसला नहीं -- यह वह कच्ची सामग्री है जिस पर यह स्थिति काम करती है, जिसे भाव, दृष्टि और कुंडली का बाक़ी हिस्सा और परिष्कृत करता है।

पौराणिक कथा

## श्रवण के पीछे की कहानी

विष्णु, महान पालनकर्ता, ब्रह्मांड को धारण करते हैं और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अपने अवतारों के ज़रिए अवतरित होते हैं। तीन-पदचिह्नों का प्रतीक उनके वामन अवतार की याद दिलाता है, जिसमें बौने-ब्राह्मण ने विशाल रूप लेकर राक्षस-राजा बलि को विनम्र बनाने के लिए तीन कदमों में पूरे ब्रह्मांड को नाप लिया। शास्त्र के ज़रिए 'सुने' जाने वाले देवता के रूप में, विष्णु श्रवण को पवित्र श्रवण और संसार को संरक्षित रखने वाले ज्ञान का नक्षत्र बनाते हैं। चंद्रमा का अपना पौराणिक स्वरूप भी है -- इसके देवता चंद्र देव (पार्वती / अप्सराएं) हैं -- और जब भी चंद्रमा श्रवण से गोचर करता है, ये दोनों कथाएं आपस में मिलती हैं। किसी ग्रह को उसके नक्षत्र के ज़रिए पढ़ना असल में एक साथ दो आदर्शों को पढ़ना है: विष्णु का श्रवण का अर्थ है 'सुनना' -- इसका विषय है सुनना, सीखना और कान के ज़रिए पवित्र ज्ञान का संचरण। जैसा क्षेत्र चंद्रमा के अपने मन और माता जैसे विषयों में अपनी बनावट जोड़ता है, इसलिए इस स्थिति को दोनों के बीच एक संवाद के रूप में समझना बेहतर है, न कि एक को दूसरे पर सीधे थोप देना।

## चारों पाद, एक-एक करके

हर नक्षत्र क्रांतिवृत्त पर ठीक 13°20′ का विस्तार रखता है, जिसे 3°20′ के चार पादों (चरणों) में बांटा गया है। शास्त्रीय ज्योतिष हर पाद को एक नवमांश (D9) राशि देता है -- एक तय, प्रकाशित नक़्शा, कोई अनुमान नहीं -- और गरिमा (उच्च, नीच, स्वराशि, मूलत्रिकोण या सम) उसी नवमांश राशि से पढ़ी जाती है, पूरे नक्षत्र से नहीं। यही कारण है कि चंद्रमा की शक्ति श्रवण के पादों में सच में बदलती है: श्रवण के देवता, प्रतीक और गण पूरे नक्षत्र में स्थिर रहते हैं, पर चंद्रमा की नवमांश शक्ति इस पर निर्भर करती है कि यह किस पाद में -- और इसलिए किस राशि में -- पड़ता है। अपना सटीक जन्म समय (और इसलिए अपना सटीक पाद) जानना ही किसी सामान्य नक्षत्र-पठन को एक सटीक पठन में बदल देता है।

### पाद 1

सम

नवमांश: मेष राशि

मेष राशि के स्वामी मंगल हैं -- चंद्रमा के लिए न मित्र, न शत्रु भूमि। यहां परिणाम गरिमा से ज़्यादा राशि के अपने अग्नि, चर स्वभाव पर निर्भर करते हैं।

### पाद 2

उच्च

नवमांश: वृषभ राशि

चंद्रमा यहां उच्च के हैं -- इसके मन और माता जैसे विषय स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ सामने आते हैं, यह इस पाद के सबसे मज़बूत परिणामों में से एक है।

### पाद 3

सम

नवमांश: मिथुन राशि

मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं -- चंद्रमा के लिए न मित्र, न शत्रु भूमि। यहां परिणाम गरिमा से ज़्यादा राशि के अपने वायु, द्विस्वभाव स्वभाव पर निर्भर करते हैं।

### पाद 4

स्वराशि

नवमांश: कर्क राशि

चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस पाद में यह अपनी ही ज़मीन पर खड़ा है -- स्थिर और आत्मविश्वासी ढंग से मन और माता जैसे विषय देता है।

## चंद्रमा और दशा स्वामी चंद्रमा

श्रवण के विंशोत्तरी दशा स्वामी स्वयं चंद्रमा ही हैं। यह एक वास्तविक और काफ़ी दुर्लभ संयोग है -- यहां स्थित ग्रह और इस आकाश-खंड का 'स्वामी' ग्रह एक ही है, इसलिए चंद्रमा के मन और माता जैसे विषय किसी बाहरी प्रभाव से मिलने की बजाय और मज़बूत हो जाते हैं। परिणाम अक्सर केंद्रित होते हैं: जब यह स्थिति मज़बूत हो, तो यह पूरी तरह चंद्रमा जैसी पढ़ी जाती है; जब यह संघर्ष करे, तो उपाय भी सीधे चंद्रमा के अपने भंडार में ही मिलता है।

## करियर की प्रवृत्तियां

श्रवण का अपना व्यावसायिक संकेत है: शिक्षण, परामर्श और भाषा या संचार से जुड़ा काम इस श्रवणशील नक्षत्र के अनुकूल है, साथ ही मीडिया, प्रसारण और श्रवण-विज्ञान भी। विद्वता, सलाहकारी भूमिकाएं, और सीखने व बोले गए शब्द पर आधारित कोई भी क्षेत्र फिट बैठता है। यह वहां उत्कृष्ट है जहां सावधानीपूर्वक सुनना और ज्ञान बांटना केंद्रीय हो। जब चंद्रमा -- मन, माता और भावनाएं का कारक -- इस नक्षत्र में बैठता है, तो यह संकेत चंद्रमा के अपने विषयों से रंग जाता है। चूंकि चंद्रमा एक सौम्य ग्रह है, इसलिए ये व्यवसाय अक्सर अधिक सहजता, सहयोग और दूसरों की सद्भावना के साथ आगे बढ़ते हैं। करियर की पूरी तस्वीर के लिए इसे दशम भाव, उसके स्वामी और चंद्रमा की राशि-गरिमा के साथ तौलें -- यह नक्षत्र-स्थिति स्वभाव बताती है, कोई तय नौकरी नहीं।

## रिश्ते और अनुकूलता

श्रवण देव गण और बंदर (मादा) यौनि का नक्षत्र है। देव गण, बंदर-यौनि नक्षत्र होने के कारण श्रवण अन्य कोमल नक्षत्रों के साथ आसानी से सामंजस्य बिठाता है; इसका ध्यानशील, ज्ञान-प्रेमी स्वभाव उस साथी के साथ अच्छी तरह मेल खाता है जो सार्थक बातचीत को महत्व दे और सीखने के प्रति इसका सम्मान साझा करे। यहां चंद्रमा के स्थित होने से, चंद्रमा हर बंधन के भावनात्मक स्वर का शासक है, इसलिए इस नक्षत्र का स्वभाव यह तय करता है कि आप रिश्तों में कैसा महसूस करते हैं, न कि सिर्फ़ कैसे व्यवहार करते हैं। व्यवहार में गण और यौनि कुंडली-मिलान के आंकड़े हैं, अंतिम फ़ैसला नहीं -- साझा मूल्य, संवाद और परिपक्वता किसी एक अनुकूलता-कारक से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं।

## स्वास्थ्य व कल्याण

नक्षत्र-स्थिति शरीर से ज़्यादा स्वभाव के बारे में बताती है, पर दो धागे ध्यान देने लायक हैं। पहला, कालपुरुष योजना में चंद्रमा का संबंध मन, रक्त और फेफड़े से है -- ऐसे क्षेत्र जिन्हें स्थिर, सामान्य देखभाल से फ़ायदा होता है। इस नक्षत्र के अपने दशा स्वामी चंद्रमा का संबंध मन और रक्त से भी है, इसलिए चंद्रमा को अकेले पढ़ने की बजाय दोनों ग्रहों के क्षेत्रों को साथ में ध्यान में रखना बेहतर है। दूसरा, श्रवण का देव-गण स्वभाव (श्रवण का अर्थ है 'सुनना' -- इसका विषय है सुनना, सीखना और कान के ज़रिए पवित्र ज्ञान का संचरण।) बताता है कि उसी स्वभाव के अनुकूल आदतें सबसे बेहतर काम करती हैं -- अधिक तीव्र गण के लिए दिनचर्या और ज़मीन से जुड़ाव, कोमल गण के लिए सादा नियमितता। यह आत्म-समझ के लिए मार्गदर्शन है, कोई चिकित्सीय निदान नहीं -- ज्योतिष प्रवृत्तियों की ओर इशारा करता है, बाक़ी काम सामान्य अच्छी देखभाल करती है।

## उपाय

पहले नि:शुल्क। किसी महँगे उपाय की आवश्यकता नहीं।

श्रवण में चंद्रमा के उपाय

श्रवण में चंद्रमा के लिए पहले-नि:शुल्क सहारा: "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः" का जप करें, विशेषकर सोमवार को। चूंकि श्रवण के अधिष्ठाता देवता विष्णु हैं, इसलिए उस देवता के प्रति सामान्य श्रद्धा -- एक पल की कृतज्ञता, एक छोटा अर्पण, या उनकी कथा पर ईमानदार चिंतन -- यह स्थिति स्वाभाविक रूप से इससे मेल खाती है। चूंकि चंद्रमा इस नक्षत्र का अपना दशा स्वामी भी है, इसलिए इसके विषय दोगुने हो जाते हैं, घुलते नहीं -- चंद्रमा की स्वाभाविक शक्तियों (मन और माता) पर भरोसा करें, बाहर देखने की बजाय। चंद्रमा से जुड़ा दान करें (सफ़ेद, चांदी जैसा रंग की वस्तुएं, सोमवार को) -- आचरण और निरंतरता किसी एक अनुष्ठान से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं।

## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा शुभ है या अशुभ?

अकेले न तो शुभ, न अशुभ -- यह इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा चार पादों में से किस में स्थित है। श्रवण में, चंद्रमा की नवमांश गरिमा सम (पाद 3, नवमांश मिथुन) से लेकर उच्च (पाद 2, नवमांश वृषभ) तक जाती है। असली तस्वीर के लिए इसे भाव-स्थिति और दृष्टि के साथ मिलाकर देखें -- कोई एक अकेली नक्षत्र-स्थिति पूरी कहानी कभी नहीं होती।

श्रवण के चार पाद चंद्रमा के परिणामों को कैसे बदलते हैं?

हर पाद एक अलग नवमांश (D9) राशि में पड़ता है, और नवमांश राशि ही शास्त्रीय गरिमा तय करती है। श्रवण में चंद्रमा के लिए, पाद 2 (नवमांश वृषभ, उच्च) पाद 3 (नवमांश मिथुन, सम) से अलग पढ़ा जाता है -- नक्षत्र वही, पर नवमांश-शक्ति सच में अलग।

क्या चंद्रमा, श्रवण के शासक ग्रह चंद्रमा का मित्र है या शत्रु?

श्रवण के दशा स्वामी चंद्रमा हैं -- जो चंद्रमा ही हैं। यह मित्र/शत्रु का संबंध नहीं बल्कि एक ही ग्रह का संयोग है, इसलिए यहां चंद्रमा के विषय किसी दूसरे ग्रह के एजेंडे में घुलने की बजाय और मज़बूत हो जाते हैं।

करियर के लिए श्रवण में चंद्रमा का क्या अर्थ है?

श्रवण शिक्षण, परामर्श और भाषा या संचार से जुड़ा काम इस श्रवणशील नक्षत्र के अनुकूल है, साथ ही मीडिया, प्रसारण और श्रवण-विज्ञान भी। चंद्रमा इसे अपने मन और माता जैसे विषयों से रंग देता है। पूरी व्यावसायिक तस्वीर के लिए इसे दशम भाव और उसके स्वामी के साथ मिलाकर पढ़ें।

रिश्तों के लिए श्रवण में चंद्रमा का क्या अर्थ है?

श्रवण एक नक्षत्र है। देव गण, बंदर-यौनि नक्षत्र होने के कारण श्रवण अन्य कोमल नक्षत्रों के साथ आसानी से सामंजस्य बिठाता है; इसका ध्यानशील, ज्ञान-प्रेमी स्वभाव उस साथी के साथ अच्छी तरह मेल खाता है जो सार्थक बातचीत को महत्व दे और सीखने के प्रति इसका सम्मान साझा करे। ये कुंडली-मिलान के आंकड़े हैं, अंतिम फ़ैसला नहीं -- साझा मूल्य और परिपक्वता किसी एक कारक से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं।

मेरे सप्तमेश (या कोई और ग्रह) श्रवण में हैं, चंद्रमा नहीं -- क्या यह पेज फिर भी लागू होता है?

सीधे तौर पर नहीं। हर ग्रह किसी नक्षत्र को अलग ढंग से व्यक्त करता है क्योंकि हर एक के अपने कारक और नक्षत्र के दशा-स्वामी से अपना संबंध होता है। यह पेज विशेष रूप से चंद्रमा के बारे में है; यदि कोई और ग्रह -- जैसे आपका सप्तमेश -- श्रवण में स्थित है, तो उस ग्रह के लिए सही तस्वीर उसका अपना "श्रवण नक्षत्र" पेज देगा।

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नक्षत्र और पाद आपके सटीक जन्म समय पर निर्भर करते हैं। अपनी असली कुंडली बनाकर हर ग्रह का नक्षत्र, पाद और गरिमा देखें -- सिर्फ़ यही एक नहीं।

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