# श्रवण नक्षत्र -- सभी 4 पाद और नवमांश राशियां

> श्रवण नक्षत्र के चारों पाद (चरण) -- हर एक के लिए सटीक डिग्री-चाप और नवमांश (D9) राशि आवरण। अपना पाद चुनें और देखें कि यह श्रवण के गुणों, करियर और रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है।
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श्रवण (Shravana) - चार पाद

## श्रवण के चार पाद

श्रवण, 10°00'-23°20' मकर तक फैला है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है। हर पाद की अपनी अलग नवमांश (D9) राशि होती है -- नीचे अपना चुनें।

श्रवण -- सुनने का नक्षत्र -- मकर के 10°00′ से 23°20′ तक है; स्वामी चंद्रमा और अधिष्ठाता विष्णु। नवमांश-क्रम इसे दूसरे पाद में उच्च का चंद्र चरण और चौथे में चंद्रमा की अपनी राशि थमा देता है -- ग्रहणशीलता के नक्षत्र के लिए उदार बंटवारा। सटीक विस्तार और नामाक्षर नीचे तालिका में हैं।

चारों चरण, गणना से

## श्रवण के चारों पाद एक नज़र में

| पाद                                     | अंश-विस्तार       | राशि | नवमांश (D9)              | नामाक्षर | स्वामी-संबंध व गरिमा         |
| --------------------------------------- | ----------------- | ---- | ------------------------ | -------- | ---------------------------- |
| [पाद 1](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/1) | 10°00′-13°20′ मकर | मकर  | मेष (Mesha) - मंगल       | खी (Khi) | तटस्थ                        |
| [पाद 2](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/2) | 13°20′-16°40′ मकर | मकर  | वृषभ (Vrishabha) - शुक्र | खू (Khu) | तटस्थ - चंद्रमा उच्च का      |
| [पाद 3](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/3) | 16°40′-20°00′ मकर | मकर  | मिथुन (Mithuna) - बुध    | खे (Khe) | मित्र                        |
| [पाद 4](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/4) | 20°00′-23°20′ मकर | मकर  | कर्क (Karka) - चंद्रमा   | खो (Kho) | समान - चंद्रमा स्वयं की राशि |

शास्त्रीय पाद-ज्यामिति (प्रति नक्षत्र 13°20′, प्रति पाद 3°20′), मानक नवमांश-चक्र और नामकरण में प्रयुक्त अवकहड़ा नामाक्षर-तालिका से गणना -- कोई पूर्व-संग्रहीत अनुमान नहीं।

पाद चुनें

## अपना सटीक चरण चुनें

[पाद 1 - पहला चरण10°00′-13°20′ मकरनवमांश राशि: मेष (Mesha), स्वामी मंगल।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/1)

[पाद 2 - दूसरा चरण13°20′-16°40′ मकरनवमांश राशि: वृषभ (Vrishabha), स्वामी शुक्र।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/2)

[पाद 3 - तीसरा चरण16°40′-20°00′ मकरनवमांश राशि: मिथुन (Mithuna), स्वामी बुध।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/3)

[पाद 4 - चौथा चरण20°00′-23°20′ मकरनवमांश राशि: कर्क (Karka), स्वामी चंद्रमा।](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana/pada/4)

[मेरा सटीक पाद जानें](https://merirashi.com/hi/birth-chart-calculator)[श्रवण अवलोकन पर वापस जाएं](https://merirashi.com/hi/nakshatras/shravana)

राशि स्थिति

## श्रवण राशिचक्र में कहां बैठता है

श्रवण मकर से कभी बाहर नहीं जाता, इसलिए इसका स्वामी चंद्रमा शुरू से अंत तक शनि की सबसे अनुशासित राशि के भीतर से सुनता है: ध्यान देना यहां श्रम है, सीखना कर्तव्य। इसीलिए इस नक्षत्र के सुनने पर भरोसा किया जाता है; हर पाद मकर का धैर्य और शोर से उसकी अरुचि साझा करता है। 13°20′ के विस्तार में न कोई सीमा कटती है, न कोई संधि छूती है, और स्वामी-संबंध उल्लेखनीय रूप से शांत चलते हैं -- दो तटस्थ चरण, फिर मैत्री, फिर घर पहुंचा चंद्रमा। चरण इसमें अलग हैं कि वे सुनते किसे हैं: निर्देश, मूल्य, तर्क या भावना। हर स्थिति में मकर की ज़मीन सुनने का दूसरा आधा हिस्सा पक्का करती है -- वह हिस्सा, जहां सुना हुआ काम में लाया जाता है।

नवमांश क्रम

## श्रवण के चार चरण कैसे खुलते हैं

पाद 1, मेष नवमांश में, तेज़ सुनता है: कर्म का विद्यार्थी, करके सीखने वाला -- जहां मंगल चंद्रमा के प्रति तटस्थ है। पाद 2 नक्षत्र का पहला शिखर है: वृषभ नवमांश में चंद्रमा उच्च का, जहां सुनना धारण बन जाता है और वाणी में प्रायः अपनी मिठास होती है; शास्त्र इस चरण को स्थिर, समृद्ध विद्या के लिए चिह्नित करते हैं। पाद 3, मित्र बुध के साथ मिथुन में, अनुवादक है: भाषाओं, माध्यमों और ठीक से पूछे गए प्रश्न का चरण। पाद 4 चंद्रमा की अपनी कर्क नवमांश-राशि पर समाप्त होता है: सहानुभूति बना सुनना -- परामर्शदाता का चरण, जहां नक्षत्र का अनुशासन अंततः शुद्ध सेवा में लगता है। उच्च का दूसरा और स्वराशि चौथा -- श्रवण की शक्ति सम पादों में इकट्ठी होती है; विषम पाद प्रश्न जुटाते हैं।

देवता, गण और स्वामी

## श्रवण के पादों के पीछे की शक्तियां

तीन डगों में ब्रह्मांड नापने वाले पालक विष्णु श्रवण के अधिष्ठाता हैं, और तीन चरण-चिह्नों का प्रतीक उनकी डग को आंखों के सामने रखता है: यहां जो सुना जाता है, उसे दूर तक ले जाया जाना है। स्वामी चंद्रमा है, गण देव, और यह मेल मकर की भूमि पर सबसे कोमल अधिकार है। विष्णु का पालन हर चरण में अलग ढंग से चलता है: मेष पाद में वे ज्ञान को उस पर कर्म करके बचाते हैं, उच्च वृषभ पाद में उसे निष्ठा से संजोते हैं, मिथुन पाद में उसे आगे अनुवादित करते हैं, और स्वराशि कर्क पाद में उससे सांत्वना देते हैं। श्रवण का कान चंद्रमा का है; जो वह सहेजता है, उसे विष्णु सहेजते हैं।

अपना पाद जानें

## अपना पाद कैसे पता करें

अपना पाद कैसे पता करें

आपका पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से पढ़ा जाता है। श्रवण, 10°00'-23°20' मकर में स्थित है, और उस दायरे में हर 3°20′ पर नया चरण शुरू होता है -- इसलिए तालिका में किसी सीमा के पास बैठा चंद्रमा जन्म-समय की छोटी-सी शुद्धि से भी पड़ोसी पाद में जा सकता है। नि:शुल्क कुंडली कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान डालकर चंद्रमा की सटीक डिग्री निकालें, फिर उसे ऊपर के विस्तारों से मिलाएं।

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## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरा चंद्रमा श्रवण के किस पाद में है?

श्रवण, 10°00'-23°20' मकर में स्थित है, जो चार बराबर 3°20′ चरणों में बंटा है -- पाद 1: 10°00′-13°20′ मकर; पाद 2: 13°20′-16°40′ मकर; पाद 3: 16°40′-20°00′ मकर; पाद 4: 20°00′-23°20′ मकर। आपका अपना पाद जन्म के समय चंद्रमा की सटीक निरयन डिग्री से तय होता है; केवल जन्मतिथि से इतना संकरा दायरा नहीं सुलझता, पर तिथि, समय और स्थान से बनी नि:शुल्क कुंडली-गणना इसे तुरंत तय कर देती है।

क्या श्रवण के चारों पाद एक ही राशि में आते हैं?

हां। पूरा श्रवण मकर के भीतर है, इसलिए चारों पाद एक ही चंद्र राशि साझा करते हैं। चरण-दर-चरण बदलती है नवमांश राशि -- मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क -- और यही कारण है कि एक ही राशि वाले दो श्रवण जातक भी एक-दूसरे से स्पष्ट अलग महसूस हो सकते हैं।

श्रवण का कौन-सा पाद सबसे मज़बूत माना जाता है?

शास्त्रीय ज्योतिष भाग्य नहीं, संरचनात्मक बल चिह्नित करता है। श्रवण में उल्लेखनीय चरण हैं: पाद 2, जहां चंद्रमा अपनी वृषभ नवमांश राशि में उच्च का है; पाद 4, जहां चंद्रमा अपनी ही नवमांश राशि में है। हर स्थिति में पाद से कहीं अधिक निर्णायक पूरी कुंडली होती है।

क्या नामकरण के लिए श्रवण का पाद मायने रखता है?

पारंपरिक नामकरण-पद्धति में, हां। श्रवण के हर चरण का अपना नामाक्षर है -- पाद 1 के लिए खी (Khi), पाद 2 के लिए खू (Khu), पाद 3 के लिए खे (Khe), पाद 4 के लिए खो (Kho) -- जो जन्म के समय चंद्रमा के पाद से चुना जाता है। अधिकांश परिवार इसे बाध्यकारी नियम नहीं, एक सार्थक परंपरा मानते हैं; कुंडली-विश्लेषण में असली वज़न पाद की ध्वनि का नहीं, उसकी नवमांश राशि का होता है।
