# हिंदू व्रत कैलेंडर 2026-2027

> 2026-2027 एकादशी, संकष्टी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या, मासिक शिवरात्रि और मंगला गौरी तारीख़ें--तिथि नियम, स्थानीय समय और सुरक्षित उपवास सहित।
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## हिंदू व्रत कैलेंडर

बार-बार आने वाले व्रत के लिए केवल तारीख़ पर्याप्त नहीं। इन मार्गदर्शिकाओं में तिथि-नियम, शहर से बदलने वाला सही समय, क्षेत्रीय अंतर और सुरक्षित व्रत-विधि के साथ 2026 और 2027 की जाँची हुई तालिकाएँ हैं।

[नई दिल्ली पंचांग](https://merirashi.com/hi/panchang/new-delhi)[त्योहार कैलेंडर](https://merirashi.com/hi/festivals)

सात उपयोगी मार्गदर्शिकाएँ

## तारीख़ से आगे की सही जानकारी

हर पृष्ठ तारीख़ चुनने का नियम, स्थानीय समय, स्वास्थ्य मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अंतर स्पष्ट करता है।

[हर चंद्र मास में दो बारएकादशी व्रत कैलेंडरएकादशी हर चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए सामान्य वर्ष में लगभग चौबीस और अधिक मास वाले वर्ष में कभी दो अतिरिक्त विष्णु-व्रत आते हैं। हर एक का अपना नाम है, लेकिन साझा क्रम अधिक महत्वपूर्ण है: दशमी को तैयारी, एकादशी को संयम और द्वादशी को पारण। यह कैलेंडर स्पष्ट रूप से स्मार्त आधार बताता है, ताकि वैष्णव या ISKCON तारीख़ अनजाने में न मिलाई जाए।अगला सूचीबद्ध व्रतकामिका एकादशीरविवार, 9 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/ekadashi)

[हर चंद्र मास में एक बारसंकष्टी चतुर्थी कैलेंडरसंकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष का मासिक गणेश व्रत है। 'संकष्टी' का भाव कठिनाई से मुक्ति है और हर मास गणेश का एक नाम जुड़ता है। माघ का सकट चौथ उत्तर भारत में विशेष रूप से बच्चों की कुशलता के लिए रखा जाता है। इसका नागरिक दिन केवल सूर्योदय से नहीं, शाम के चंद्रोदय से तय होता है क्योंकि अनेक परिवार चंद्र अर्घ्य के बाद व्रत पूरा करते हैं।अगला सूचीबद्ध व्रतगजानन संकष्टीरविवार, 2 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/sankashti-chaturthi)

[हर चंद्र मास में दो बारप्रदोष व्रत कैलेंडरप्रदोष दोनों पक्षों की त्रयोदशी का शिव-व्रत है। इसका निर्णायक नियम तारीख़ नहीं, सूर्यास्त बाद प्रदोष काल और त्रयोदशी का मेल है। इसलिए स्थान गणना का मुख्य हिस्सा है। सोमवार का सोम प्रदोष, मंगलवार का भौम और शनिवार का शनि प्रदोष नाम प्रसिद्ध हैं, पर मूल पूजा एक ही शैव संध्या-साधना है।अगला सूचीबद्ध व्रतसोम प्रदोषसोमवार, 10 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/pradosh)

[हर चंद्र मास में एक बारपूर्णिमा व्रत कैलेंडरपूर्णिमा शुक्ल पक्ष का समापन है। मासिक व्रत में सत्यनारायण या विष्णु पूजा सामान्य है, जबकि माघ पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा अपने अलग पर्व हैं। कभी 'पूर्णिमा व्रत' एक दिन और नामित पूर्णिमा-पर्व अगले दिन दिखता है; यह मार्गदर्शिका व्रत स्तंभ को लगातार मानती और अंतर समझाती है।अगला सूचीबद्ध व्रतश्रावण पूर्णिमा व्रतगुरुवार, 27 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/purnima)

[हर चंद्र मास में एक बारअमावस्या कैलेंडरअमावस्या नया-चंद्र तिथि है और पितृ-स्मरण, शांत साधना, स्नान व दान का मासिक दिन है। माघ की मौनी अमावस्या, सोमवार की सोमवती, वर्षा की हरियाली और कार्तिक की दिवाली अमावस्या विशेष नाम हैं। अंधेरी रात के कारण अनेक लोक-निषेध बने, पर जिम्मेदार जानकारी स्थापित कर्म और डर-आधारित अंधविश्वास में अंतर रखती है।अगला सूचीबद्ध व्रतश्रावण अमावस्याबुधवार, 12 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/amavasya)

[हर चंद्र मास में एक बारमासिक शिवरात्रि कैलेंडरमासिक शिवरात्रि हर कृष्ण चतुर्दशी की शिव-रात्रि है। वार्षिक महाशिवरात्रि सबसे प्रसिद्ध और श्रावण वाली उत्तर भारत में सावन शिवरात्रि कही जाती है। निर्णायक नियम निशीथ-स्पर्श है: चतुर्दशी स्थानीय मध्य-रात्रि पूजा समय में होनी चाहिए, इसलिए केवल सुबह की 'चौदहवीं तिथि' से दिन नहीं निकाला जा सकता।अगला सूचीबद्ध व्रतसावन शिवरात्रिमंगलवार, 11 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/masik-shivaratri)

[श्रावण मास के हर मंगलवारमंगला गौरी व्रत कैलेंडरमंगला गौरी व्रत श्रावण के मंगलवारों पर होता है और महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा आसपास के समुदायों में नवविवाहित महिलाओं से विशेष रूप से जुड़ा है। गौरी को शक्ति, कल्याण और गृहस्थ साझेदारी के रूप में पूजा जाता है। सही कैलेंडर में दो सूची जरूरी हैं: उत्तर का पूर्णिमांत और पश्चिम-दक्षिण का अमांत श्रावण लगभग पंद्रह दिन अलग शुरू होता है।अगला सूचीबद्ध व्रतपहला मंगला गौरी व्रतमंगलवार, 4 अगस्त 2026तारीख़ें और मार्गदर्शिका देखें](https://merirashi.com/hi/vrat/mangala-gauri)

तारीख़ें नई दिल्ली संदर्भ पर जाँची गई हैं। चंद्रोदय, सूर्यास्त, निशीथ और पारण के लिए अपने शहर का पंचांग ही उपयोग करें।
